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कर्नाटक का राजनीतिक संकट: इस ‘कहानी’ के हो सकते हैं ये चार अंत

नई दिल्ली
कर्नाटक का राजनीतिक घटनाक्रम बेहद नाटकीय हो गया है। कांग्रेस-जेडीएस के बागी विधायकों ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर दस्तक दी है। इन विधायकों का आरोप है कि विधानसभा स्पीकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं और जानबूझकर उनके इस्तीफे को स्वीकार करने में समय ले रहे हैं।
बागी विधायकों ने यह कदम उस समय उठाया, जब मंगलवार को विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कहा कि 13 बागी विधायकों के इस्तीफ के मामले के लिए उन्हें कम से कम 6 दिन की जरूरत है। इससे कांग्रेस-जेडीएस को रणनीति बनाने का समय मिल सकता है।
224 सदस्यों की विधानसभा में बहुमत के लिए 113 की जरूरत है। 13 बागी विधायकों के अतिरिक्त कांग्रेस के सस्पेंड किए गए विधायक रोशन बेग ने भी इस्तीफा दे दिया है। हालांकि बेग का दावा है कि वे बागी विधायकों के साथ भी नहीं हैं। इसका मतलब है कि यदि बेग समेत कांग्रेस के बागी विधायकों का इस्तीफा मंजूर हो जाता है तो कांग्रेस के विधायकों की संख्या 102 हो जाएगी। वहीं दूसरी तरफ दो निर्दलीय और एक बीएसपी विधायक के समर्थन से बीजेपी के सदस्यों की संख्या 108 हो गई है
1. संकट से निकलेंगे कांग्रेस-जेडीएस
बागी विधायकों में से 4 या 5 विधायक गठबंधन में वापसी के लिए राजी हो जाएं और कैबिनेट पॉर्टफोलियो लेने की शर्त पर अपना इस्तीफा वापस ले लें। कांग्रेस बीजेपी के विधायकों में सेंधमारी करे और उनके 4-5 विधायकों के इस्तीफे करा दे।
2. बीजेपी की सत्ता में वापसी
यदि स्पीकर बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लेते हैं तो बीजेपी के पक्ष में 108 विधायक होंगे। ऐसे में बीजेपी फिर से सरकार बनाने की स्थिति में होगी। वहीं कांग्रेस-जेडीएस की संख्या घटकर 102 हो जाएगी। 13 विधायकों के इस्तीफे की हालत में 106 के संख्याबल पर सरकार बनाई जा सकती है। ऐसे में राज्यपाल बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता दे सकते हैं।
3. सुप्रीम कोर्ट करे दखल
10 बागी विधायकों ने स्पीकर पर जानबूझकर इस्तीफा स्वीकार करने में देर करने का आरोप लगाकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ऐसे में कोर्ट स्पीकर से जल्द फैसला लेने को कह सकती है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट फ्लोर टेस्ट का आदेश भी दे सकता है।
4. फिर से चुनाव
यदि बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार हो जाते हैं और बीएसपी समेत दो निर्दलीय विधायक बीजेपी का समर्थन करने से इनकार कर देते हैं तो बीजेपी अपने 105 विधायकों के साथ भी बहुमत से दूर रह सकती है। इस स्थिति में राज्यपाल राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। ऐसे में कुमारस्वामी को अगले चुनाव तक कार्यकारी मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है या अगले चुनाव तक राज्य का पूरा कामकाज राज्यपाल की देखरेख में हो सकता है।



