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विधायकों के इस्तीफे के कारण एचडी कुमारस्वामी सरकार गिरने का खतरा बढ़ा.

नई दिल्ली:

कर्नाटक में सियासी संकट गहराता जा रहा है. राज्य की कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार में से 13 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं, जो फिलहाल मुंबई के एक होटल में ठहरे हुए हैं. इनमें से 10 विधायक कांग्रेस और 3 जनता दल यूनाइटेड (जेडीएस) के हैं. इन विधायकों के इस्तीफे के कारण एचडी कुमारस्वामी सरकार गिरने का खतरा बढ़ गया है.

हालांकि, अब तक इन विधायकों के इस्तीफे मंजूर नहीं हुए हैं. विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार ने कहा, रविवार को छुट्टी है. सोमवार को वह बेंगलुरु में नहीं हैं. लिहाजा मंगलवार को इस मसले को देखेंगे. 13 विधायकों के इस्तीफे के बाद क्या होगा और फिलहाल विधानसभा का गणित क्या है, आइए आपको बताते हैं.

कर्नाटक विधानसभा में किसके पास कितनी सीटें

कर्नाटक की 225 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन सरकार के पक्ष में 118 विधायक थे. यह संख्या बहुमत के लिए जरूरी 113 से पांच ज्यादा थी. इसमें कांग्रेस के 79 विधायक (विधानसभा अध्यक्ष सहित), जेडीएस के 37 और तीन अन्य विधायक शामिल रहे हैं. तीन अन्य विधायकों में एक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से, एक कर्नाटक प्रग्न्यवंथा जनता पार्टी (केपीजेपी) से और एक निर्दलीय विधायक है. विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास 105 विधायक हैं.

जेडीएस के 37 विधायक हैं और उसके 3 विधायकों ने इस्तीफा दिया है. अब उसके सदस्यों की संख्या 34 हो गई है. वहीं कांग्रेस के कुल 80 विधायक हो गए थे, जिनमें से 10 ने इस्तीफा दिया है (जिसमें आनंद सिंह का इस्तीफा भी शामिल है) तो उसके विधायक 70 हो गए हैं, जिसमें स्पीकर भी शामिल हैं. बसपा और निर्दलीय के एक-एक विधायक हैं. कांग्रेस और जेडीएस के मिलाकर अब 106 विधायक हैं, जिनमें बसपा और निर्दलीय विधायक भी शामिल है.

फिलहाल बसपा और निर्दलीय विधायक का कहना है कि वे गठबंधन सरकार के साथ हैं. 224 विधायकों (स्पीकर के बिना) वाली कर्नाटक विधानसभा में 13 विधायकों के इस्तीफे के बाद सदस्यों की संख्या 211 हो गई है. लेकिन स्पीकर उनका इस्तीफा मंजूर करने में वक्त ले सकते हैं. अगर स्पीकर इस्तीफा मंजूर करते हैं तो कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ जाएगी और फ्लोर टेस्ट पास नहीं कर पाएगी.

राज्य विधानसभा का 10 दिवसीय मॉनसून सत्र 12 जुलाई से होना है, जिस दौरान मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 के लिए राज्य के बजट को मंजूरी दी जानी है और लंबित विधेयकों व विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होनी है, जिसमें किसानों की कर्जमाफी, सूखा राहत कार्य और जल संकट शामिल हैं. गौरतलब है कि यह कोई लिखित प्रक्रिया नहीं है कि इस्तीफा देने के बाद उसे स्पीकर कितने वक्त में मंजूर करे. लेकिन मानदंड के मुताबिक यह जल्द से जल्द मंजूर होना चाहिए.

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