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मायावती -बीएसपी किसी भी राज्य में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी.

लखनऊ
लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्ष के महागठबंधन को झटका लगा है। बीएसपी प्रमुख मायावती ने मंगलवार को कहा कि पार्टी किसी भी राज्य में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी। वहीं मायावती को जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा है, ‘हमें उनकी (मायावती) जरूरत नहीं है।

मायावती ने अपने बयान में कहा, ‘एक बार फिर बहुजन समाज पार्टी स्पष्ट करती है कि हम कांग्रेस के साथ किसी भी राज्य में गठबंधन नहीं करेंगे।’ एसपी के साथ गठबंधन के बारे में मायावती ने कहा कि यह हमारे बीच के आपसी सम्मान और ईमानदार लक्ष्य की वजह से है।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी से मुकाबला करने के लिए एसपी और बीएसपी ने गठबंधन किया है लेकिन कांग्रेस को इससे बाहर रखा है। हालांकि यह फैसला किया गया है कि एसपी और बीएसपी रायबरेली और अमेठी सीट पर अपने प्रत्याशी नहीं उतारेंगी। उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर एसपी 37 और बीएसपी 38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। तीन सीटों प अजीत सिंह की राष्ट्रीय लोक दल (RLD) चुनाव लड़ेगी। इसके अलावा दो सीटें सोनिया गांधी (रायबरेली) और राहुल गांधी (अमेठी) के लिए छोड़ी गई हैं।

मायावती का यह बयान तब आया है जब कांग्रेस की CWC की अहमदाबाद में बड़ी बैठक थी। इसमें पार्टी प्रेजिडेंट राहुल गांधी और सोनिया गांधी भी मौजूद थे। यूपी में कांग्रेस के प्रवक्ता राजीव बख्शी ने कहा कि यह फैसला मायावती के हाथ में नहीं था कि गठबंधन होना है या नहीं। उन्होंने कहा, ‘संसद में उनकी एक भी सीट नहीं है। वह कैसे फैसला करेंगी कि कांग्रेस को साथ आना है या नहीं। हम अकेले चुनाव लड़ रहे हैं और किसी गठबंधन की जरूरत नहीं है। हमें उनकी जरूरत नहीं है।’

बख्शी ने कहा, ‘कांग्रेस के बारे में बोलने से पहले उन्हें अपने गठबंधन में एसपी पर काम करना चाहिए जो खुद ही टूट रही है। 15 से 20 दिन इंतजार करिए और फिर देखिए क्या होता है।’ उन्होंने कहा कि बीएसपी के साथ गठबंधन के बारे में कोई बात भी नहीं हुई। वह खुद ही उतावली हैं
इस बीच मायावती के इस बयान से जाहिर होता है कि बसपा आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से दूरी बनाए रखना चाहती है। बसपा और सपा के बीच मध्य प्रदेश में भी चुनावी समझौता हुआ है। कांग्रेस और बसपा के बीच राजनीतिक दूरी तीन हिंदी राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनावों के दौरान भी देखने को मिली थी। मध्य प्रदेश में गठबंधन न होने के लिए मायावती ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था।

समझा जाता है कि मायावती के चलते ही सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस को जगह नहीं मिल पाई। कांग्रेस के साथ गठबंधन न करने के पीछे मायावती का अपना तर्क भी रहा है। बसपा सुप्रीमो का कहना है कि चुनावों में उनकी पार्टी का वोट बैंक कांग्रेस और अन्य दलों को आसानी से ट्रांसफर हो जाता है लेकिन उनका वोट बसपा को नहीं मिल पाता। यही नहीं उत्तर प्रदेश में दलित और मुस्लिम कभी कांग्रेस पार्टी के वोट बैंक रहे हैं। मायावती को आशंका इस बात की रहती है कि कांग्रेस उनके वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।

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