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भारत ने समुद्र के रास्ते हमले की कोशिश कीः पाकिस्तान उर्दू प्रेस रिव्यू

पाकिस्तान अपनी धरती पर सक्रिय चरमपंथी संगठनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का दावा कर रहा था वहीं दूसरी तरफ़ उसका कहना था कि भारत ने बालाकोट हवाई हमले के बाद समुद्र के रास्ते से भी हमले की कोशिश की थी जिसे पाकिस्तानी नेवी ने नाकाम कर दिया.

अख़बार एक्सप्रेस ने सुर्ख़ी लगाई थी, ”पाक नेवी ने भारतीय पनडुब्बी के हमले को नाकाम कर दिया.” अख़बार ने पाकिस्तानी नौसेना के प्रवक्ता कोमोडोर ओबैदुल्लाह के हवाले से लिखा है कि सोमवार की शाम पाकिस्तानी समयानुसार क़रीब आठ बजकर 35 मिनट पर पाकिस्तानी मैरीटाइम ज़ोन में घुसने की कोशिश कर रही भारतीय पनडुब्बी को पाकिस्तानी नौसेना ने पीछे हटने पर मजबूर कर दिया.”

”नौसेना के प्रवक्ता के अनुसार पाकिस्तान ने क्षेत्र में शांति क़ायम रखने के लिए भारतीय पनडुब्बी को निशाना नहीं बनाया. प्रवक्ता के अनुसार भारतीय पनडुब्बी उच्चस्तरीय आधुनिक तकनीक से लैस थी फिर भी वो पाकिस्तानी पानी की सरहद में ख़ुद की पहचान छिपाने में नाकाम रही और पाकिस्तानी नेवी ने न केवल उसे पहचान लिया बल्कि भारतीय पनडुब्बी को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया. लेकिन भारत ने पाकिस्तान के इस आरोप को ख़ारिज कर दिया है.”

पाकिस्तान कश्मीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दा

अख़बार दुनिया में वरिष्ठ राजनीतिक समीक्षक रऊफ़ ताहिर ने अपने कॉलम जम्हूरनामा में इस बार भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में हुए चरमपंथी हमले और फिर जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना के हमले के बाद से पैदा हुए हालात का ज़िक्र किया है.

इस बार कॉलम का शीर्षक है ‘जुनूनी मोदी का शुक्रिया.’ रऊफ़ ताहिर लिखते हैं कि पुरानी कहावत है कि किसी बुरी चीज़ से भी अच्छी चीज़ निकलकर जा आती है.

लेखक के अनुसार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल के कुछ फ़ैसलों ने कश्मीर को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है. उनके अनुसार तीन जुलाई 1972 को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए शिमला समझौते के तहत कश्मीर को एक अंतरराष्ट्रीय समस्या के बजाय दो देशों के बीच आपसी समस्या क़रार दिया गया था जिसे दोनों देश आपसी बातचीत के ज़रिए सुलझा सकते हैं.

इसलिए शिमला समझौते के बाद एक लंबे अर्से तक पाकिस्तान ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय फ़ोरम पर कश्मीर का मुद्दा नहीं उठाया था.

90 के दशक में भारत प्रशासित कश्मीर में एक बार फिर भारत विरोधी हिंसक आंदोलन शुरू हो गया और 1998 में भारत और पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण के कारण दुनिया ने कश्मीर को न्यूक्लियर फ़्लैशप्वाइंट क़रार दिया.

फिर 2013 और 2014 के संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा उठाया था, लेकिन पाकिस्तान उससे ज़्यादा कुछ ख़ास नहीं कर सका था. इस कॉलम में रऊफ़ ताहिर मोदी का शुक्रिया अदा करते हुए लिखते हैं कि मोदी ने एक बार फिर कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है.

लेकिन अख़बार जंग के अनुसार भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव में कमी को देखते हुए दोनों देशों के उच्चायुक्त ने एक दूसरे के यहां जाकर काम शुरू कर दिया है और करतारपुर कॉरिडोर पर बातचीत करने के लिए पाकिस्तानी प्रतिनिधि मंडल 14 मार्च को नई दिल्ली आएगा जबकि भारतीय दल 28 मार्च को इस्लामाबाद जाएगा.
हिंदू महिला ने चलाया पाकिस्तान का सदन

इस बीच पाकिस्तान से एक और अच्छी ख़बर आई जब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के एक मंत्री को कथित हिंदू विरोधी बयान के कारण उनके पद से हटा दिया गया है.

पंजाब के सूचना एवं प्रसारण मंत्री फ़ैय्याज़ चौहान ने हिंदुओं के लिए अपशब्द का इस्तेमाल किया था जिसके बाद पाकिस्तान में सोशल मीडिया में उनके ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू हो गया और फिर सरकार ने लोगों को मूड भांपते हुए उन्हें फ़ौरन बर्ख़ास्त कर दिया. पाकिस्तान के इस फ़ैसले का भी भारत पर अच्छा असर पड़ा.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में एक दलित हिंदू महिला कृष्णा कुमारी को सदन चलाने की ज़िम्मेदारी दी गई.

कृष्णा कुमारी सिंध प्रांत से पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की तरफ़ से सीनेट की सदस्य हैं. इस मौक़े पर कृष्णा कुमारी ने कहा कि इस कुर्सी पर बैठकर वो गर्व महसूस कर रही हैं.

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