ब्रेकिंग न्यूज़

हथियार और रक्षा उपकरण आयात करने के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे : रिपोर्ट

अकेले भारत की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत,रूस से खरीदे 62 प्रतिशत हथियार,

हथियार और रक्षा उपकरण आयात करने के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे : रिपोर्ट

चर्चित संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) ने सोमवार को हथियार और रक्षा उपकरणोंं की खरीद के बारे में एक रिपोर्ट पेश की. इसके मुताबिक हथियार और रक्षा सामग्री आयात करने वाले देशों में भारत शीर्ष पर है. रिपोर्ट के मुताबिक 2008 से 2012 की तुलना में 2013 से 2017 के बीच भारत के हथियार आयात में 24 फीसदी की भारी-भरकम वृद्धि भी हुई है. साथ ही, इस दौरान दुनिया के तमाम देशों की तरफ से आयात किए हथियारों में अकेले भारत की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत की रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक बड़े हथियार आयातकों में सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, आॅस्ट्रेलिया, अल्जीरिया, इराक, पाकिस्तान और इंडोनेशिया भी शामिल हैं. जहां तक भारत की बात है तो 2013-17 के दौरान इसने सबसे ज्यादा हथियार रूस से खरीदे. वहां से कुल हथियारों का 62 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया गया. इसके बाद अमेरिका से 15 फीसदी और इजरायल से 11 प्रतिशत हथियारों और रक्षा उपकरणों का आयात हुआ.

एसआईपीआरआई की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हथियारों के लिहाज से बीते काफी समय से भारत की निर्भरता रूस और इजरायल पर रही है. इधर बीते कुछ वर्षों में हिंद महासागर और एशिया में चीन के बढ़ते दखल के मद्देनजर अमेरिका ने भारत के साथ नजदीकी बढ़ाई है. इस निकटता का प्रभाव है कि बीते एक दशक के दौरान दोनों देशों के बीच 15 अरब डॉलर के रक्षा सौदे भी हुए हैं.’

इस रिपोर्ट में हथियारों के निर्यातक देशों का जिक्र भी किया गया है. इसके मुताबिक अमेरिका, रूस, फ्रांस और जर्मनी के बाद हथियार निर्यात करने वालों में चीन पांचवां सबसे बड़ा देश है. चीन का सबसे बड़ा ग्राहक उसी का पड़ोसी पाकिस्तान है. वह उसे 35 प्रतिशत हथियार निर्यात करता है. इसके बाद बांग्लादेश की बारी आती है जिसे वह 19 प्रतिशत हथियार निर्यात करता है.

रिपोर्ट के मुताबिक हथियार संबंधी भारत की 65 प्रतिशत जरूरतें आयात के जरिये ही पूरी होती हैं. रक्षा उपकरणों के निर्माण से जुड़ी भारतीय कंपनियां अभी भी सशस्त्र सेनाओं की जरूरतें पूरी कर पाने में सक्षम नहीं हो पाई हैं. उधर, सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना था कि सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों के पास सामर्थ्य की कमी नहीं है. उनके मुताबिक इनमें जान फूंककर इन्हें शक्तिशाली बनाए जाने की जरूरत है जिससे रक्षा जरूरतों को देश में ही पूरा किया जा सके.

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker